यह क्या माजरा हैं
यह क्या काल चक्र हैं
बस मैं ही लूट रहा हूँ
बस मैं ही जल रहा हूँ
जनम ही धोका हैं
क्या मौत भी धोका हैं
क़िस्मत से अपाहिज हूँ
साथी भी थोड़ा दोगला हैं
बस मुझे अब मौत का इंतेज़ार हैं
यह क्या माजरा हैं
यह क्या काल चक्र हैं
बस मैं ही लूट रहा हूँ
बस मैं ही जल रहा हूँ
जनम ही धोका हैं
क्या मौत भी धोका हैं
क़िस्मत से अपाहिज हूँ
साथी भी थोड़ा दोगला हैं
बस मुझे अब मौत का इंतेज़ार हैं